निशब्द.... इकलौती बेटी हो तुम मेरी, इकलौती छोड़ो एक लड़की हो तुम। तुम्हारा एक कदम हजारों लड़की के लिए दरवाजे खोल और बंद कर सकता है। ऐसा उन्होंने 2013 की शाम 7 बजे जोधपुर के रेलवे स्टेशन पर कहीं। मैंने भी उनकी आंखों की ओर देखते हुए कहा विश्वास नहीं तो वापस घर चलते है। दिल्ली का सपना किसी ओर दिन पूरा कर लेगे पापा.....उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा तूने आज तक कुछ नहीं मांगा पहली बार इच्छा रखी है बाप से दूर जानें की तो कैसे पूरी ना करूं पर बेटा मुझे इस भटकाती दुनिया पर यकीन नहीं। तुम मुझसे वादा करों कुछ भी हो जाए, चाहे जैसी बात हो ( भारी मन से कहते हुए ) समझ रही हो ना क्या कह रहा हूं। इस बाप से कुछ मत छुपाना...लंबी सांस लेते हुए मुझे अपने सीने से लगाते हुए दिल्ली की ट्रेन में बैठ गए। खैर ये तो मेरी बात थी। मैं अपने इस लेख में ना जाने कितनी बातें कहना चाहती हूं लेकिन उतना ही कहूंगी जितना आपको हजम हो जाए। 1 अप्रैल शाम को व्हाट्सएप मैसेज आता है कि एक्ट्रेस प्रत्यूषा बनर्जी नहीं र...