किक्रेट के शोर में हॉकी को मत भूल जाना...
इंडिया मैच हार गई है। वो भी 180 रनों से। सोशल मीडिया से लेकर टीवी के सूट-बूट वाली डिबेटों तक हमारी हार को याद दिलाया जा रहा है। हम जितना मॉर्डन वर्ल्ड की तरफ बढ़ रहे हैं उतना सोचने समझने की क्षमता को कम करते जा रहे हैं। आज कल सही-गलत का फैसला फेसबुक-ट्विटर पर बहसबाजी करके लेने लगे है। फेसबुक की भाषा में बोलूं तो दिल बोले किक्रेट..और स्टेट्स बोले हॉकी हॉकी। देखकर बड़ा बुरा लगा किक्रेट की हार ने हॉकी की जीत को परास्त कर दिया। पाकिस्तान एक मैच हार कर भी हमारी जीत को चिढ़ा रहा है। हम भी वैसा ही व्यवहार कर रहे हैं जैसा पाकिस्तान चाहता है। वो हार कर भी जीत का जश्न मना रहे हैं और हम जीत कर भी हार पर आंसू बहा रहे हैं। मैच शुरू होने से पहले दोनों देश सोशल मीडिया पर भिड़े गए। कोई टीम इंडिया को फौजी की उपाधि दे रहा तो कोई भारत को पाकिस्तान के खिलाफ हानिकारक बापू बताने की जुगत में लगा। मेरे लिए ये बड़ी अफसोस जनक बात रही कि इन सब में कही भी राष्ट्रीय खेल का जिक्र नहीं हुआ। जहां तक मुझे याद है तो हॉकी और क्रिकेट भारत को अंग्रेजी राज से विरासत में मिला है। लेकिन हम उ...