जो बुरा है उसे गौर से देखो..मुमकिन है कोई अच्छाई नजर आ जाए
कुछ दिन पहले सफर के दौरान ऐसा कुछ देखा जिसके बाद मर्दों पर शक करना जरा सा कम कर दिया। हां अब मैं मान चुकी हूं कि स्ट्रगल करियर और प्यार में ही नहीं हर जगह है। अब यहां भी कुछ ऐसा ही हुआ... उस दिन बस में भीड़ ज्यादा होने वजह से सीट नहीं मिली। जैसे-तैसे खड़ी होने को जगह मिली ही थी कि एक आदमी फोन पर जोर से चिल्लाने लगा। बात करने का तरीका..ऐसा था कि जैसे घर की महिला से तंग हो....ज्यादा देर सुन नहीं सकी तो मैंने कहा, प्लीज थोड़ा प्यार से बात कर लो और लोगों को क्यों सुना रहे हो, तब से बंदा मुझे और मैं उसे देखने में बिजी हो गए। वहीं पास की एक सीट पर बैठा एक आदमी व्हाट्सएप पर धड़ाधड़ किसी से सेटिंग करने में बिजी था। कई बार इग्नोर करने की कोशिश की लेकिन बातें कुछ ऐसी थीं कि नजर हटा नहीं सकी.. खैर जनाब अपने व्हाट्सएप पर किसी जानू नाम की गर्लफ्रेंड को लिख रहे थे, आज रात गाड़ी का इंतजाम हो गया है , चलेंगे..और आज तुम मना नहीं करोगी...जानू का रिप्लाई शर्माने वाली स्माइली के तौर आता है...काफी देर उनके बीच लंबा डिस्कशन इसी बात का चलता है कि वो अपनी रात घर से दूर कैसे बिताने वाले है। तभी रोमांस मे...