सोशल मीडिया टाइमपास या बदलाव का मंच
जैसा की अभी कुछ दिन पहले दिल्ली की सड़को पर देखा गया ऐसी लड़की का आन्दोलन जिसका नाम हर घर में अलग अलग लिया जाता रहा है हम बात कर रहे है निर्भया रेपकाण्ड का वो ऐसा आन्दोलन था जिसके लीडर का नाम ना ही आप जानते है ना ही ये समाज जो समय समय पर सड़को पर आ कर अपने हक के लिए या फिर उस लड़की के हक के लिए लड़ रहे थे जिसका वो नाम भी नही जानते हमारे इस विभिनता वाले देश में कई विभिन तरह के काम होते है जिसको इस सोशल मीडिया ने सामने लाया है या फिर ये कह लिया जाये की लोगो को एक मंच दे दिया गया जिस पर वह अपनी राय कुछ ही मिनटों में सामने रख देते है फिर वो गुजरात का विकास मुदा हो, या केजरीवाल की 46 दिन की सरकार हो या फिर इस देश का सबसे बड़ा आन्दोलन “अन्ना हजारे” का आन्दोलन गूगल सर्च इंजन पर अन्ना टाइप करते ही एक अरब से +जादा सर्च दिखाई पड़ते है सोशल मीडिया पर एक दर्जन से जादा साइट्स लोगो ने “इंडिया अगेंस्ट करप्शन” के नाम से स्थापित कर रखी है जिसका रंग जितना धरातल पर था उस से जादा इस आन्दोलन को सोशल मीडिया पर लड़ा जा रहा था शायद अन्ना को इस मीडिया के द्वारा अच्छा लाभ मिल रहा होगा क्यों की समय समय पर उनके पास लोगो की परेशानी और कई तरह के सुझाव मिल रहे थे जिन की वजह से वह बड़ी से बड़ी बाधा को पार कर जाते थे इस के कारण लोगो के मूड को जानने का मोका मिला जिस कारण टीम अन्ना इतनी बड़ी संख्या में लोगो को जोड़ पाने में कामयाब रहा आज सोशल मीडिया हम लोगो की ज़िन्दगी में अच्छे से पैर पसार चूका है
लोगो की नज़र अखबारों से पहले सोशल मीडिया पर जाती है मानो जैसे की उनकी उगलिया सोशल मीडिया की कटपुतलिया बन गयी हो, इस तरह के तमाम मुदे है मेरे पास जिसको सोशल मीडिया में पहले उठाया गया और फिर कुछ समय बाद वो न्यूज़ चैनल की ब्रेकिंग न्यूज़ बनी सोशल साइट ने लोगो को एक दुसरे से जुड़ने का मोका दिया आज हमारे समाज में हर मध्यमवर्गीय परिवार टेक्नोलॉजी फ्रेंडली हो गया है आज से दस साल पीछे जा कर देखे तो हम लोग इन सब चीजों से नही जुड़े हुए थे हम अपने विचारो को किसी के सामने रखने के लिए किसी मंच की तलाश में रहते थे कई लेखक अपने विचारो को किताबो में जगह देने के लिए भागम-भाग करते थे पहले लोगो के पास अच्छे विचार थे पर साधन बड़े सीमित थे अपने विषय के संबंद्ध में टिप्पणी जानने के लिए थोडा इंतजार करना पड़ता था पर आज सोशल मीडिया ने हमको एक मंच उपलब्ध कर वाया जिसको कुछ जादा समय की भी जरुरत नही है आपकी बात को समाज तक लाने के लिए बस एक क्लिक जरुरी है
सोशल मीडिया एक प्रकार से हमारी सभ्यताओं की छेड़छाड़ तो साबित हो रही है पर इस की चिंता अंधिकाश लोगो को नही है पर देश की सुरक्षा को मध्य नज़र रखते हुए इस पर अंकुश लगाना जरुरी है भारत ने वर्ष २००० में सूचना से संबंधित एक अधिनियम पारित किया जिसमे आज कल विकसित हो रही है नयी नयी प्रवितियो से सबंध तमाम समस्याओं के क़ानूनी प्रावधान व् समाधान भी रहने की जरुरत है आज हमारा युवा वर्ग ही नही हमारे बच्चे भी इस नेटवर्किंग के जाल में फसते जा तहे है उन्हें कही भटकने से बचाने के लिए क़ानूनी सुरक्षा तो बड़ी सामयिक माग है भारत में आज इंटरनेट के उपयोग करने वालो के संख्या १०० मिलियन पार कर चुकी है और इस की संख्या लगातार बढती जा रही है पुरे विश्व में इंटरनेट का उपयोग करने वालो की संख्या १०० करोड़ से भी जादा है जहा तक फेसबुक की बात है तो उसके यूजर भारत में ३.३ करोड़ है वास्तव में सोशल मीडिया ने हर किसी के कारोबार पर एक तरह का प्रभाव डाला है जैसा की कुछ प्रिंट मीडिया ने अपने अखबारों को डिजिटल रूप दे दिया है ये बात हम विदेश की कर रहे है क्यों कि अभी भारत में इंटरनेट का इतना फैलाव नही है हमारे देश में यह अभी सीमित वर्ग तक ही है और अभी काफी टाइम लगेगा हमें डिजिटल रूपरेखा में आने के लिए
गुज़रे ज़माने की बात है मैंने तो अक्सर किताबो में और किसी तरह की चल-चित्रों में गावो की चोपाल को देखा या पढ़ा हो जिस में खबरों को जानने वाले से लेकर उस बात पर किस तरह की प्रतिक्रिया हो रही है इस पर पूरे गाव की नज़र रहती थी ये तो थी हमारे समाज के अन्दर बसी सामाजिकता ऐसा नही है की अब हमारे पास कोई चोपाल या सामाजिकता नही है दोनों है बस उनके होने और हमारे जुड़ने का तरीका बदल गया है जिसे हम सोशल मिडिया और उससे जुड़ने की प्रकिया को सोशल नेटवर्किंग कहते है इस पर आज कल नया दोर सा सोशल मीडिया पर देखने को मिल रहा है वो है हमारे नेतागण लोगो को ये माध्यम रास सा आ गया है आज कल वो अपनी जनसभा,रेली आदि करने से पहले अपने नए युवा से इस सोशल मीडिया से उसके साथ ताल-मेल बैठाने की कोशिश कर रहे है ऑनलाइन सेवा दे कर या अपना ब्लॉग अपडेट करके अपने फेसबुक पेज या फिर ट्विटर पर पोस्ट कर के युवा वर्ग की राय पहले ले रहा है जैसा की अभी 16वी लोकसभा के चुनावों में देखने को मिला कितना वर्ग मोदी के नाम की माला जपना शुरु कर दिए ये क्या है ये सोशल मीडिया का प्रभाव है जो आज हमारे सर चढ़ का मोदी लाओ के नारा लगा रहा है सोशल मीडिया कई कामो के लिए बड़ी तारिफ भी बटोरी है और अपनी आलोचना भी करवाई है आज के 11-20 साल के बच्चो की जो बिना किसी डर या शर्म के सोशल मीडिया का इस्तेमाल केवल अपने समय बिताने के लिए कर रहा है उसको देश दुनिया से कुछ नही लेना देना जो बिना समझ के कई साइट की विजिट कर लेता है सोशल साइट का इस्तेमाल अच्छे कामो के साथ बुरे कामो के लिए भी परचलित है सोशल मीडिया ने समाज में घट रही चीजों को देखने का नजरिया दिया है सोशल मीडिया एक बेहतर साधन के रूप में सामने आया है इस के जरिये आप अपनी बात को लोगो के सामने संषेप में दे सकते है आज सोशल साइट लोगो के बीच एक विश्वासस्पद के रूप में काम कर रही है
इस तरह हमारे देश में कई समस्याए है अगर सही प्रकार से गोर किया जाए तो पर हम लोग इन चीजों के बारे में तब सोचते है जब हमारे दरवाजे पर समस्याए आती है तब हम उनसे सिर्फ बचने के लिए हाहाकार मचाने लगते है तुरत बदलाव की बाते करने लगते है आखिर क्यों पहले क्या परेशानिया या इस देश में घोटाला नही हुआ तब हम अपने आपको इस तरह से पेश करते है जैसे अभी अभी नींद से जागे हो और तब हम सोशल मीडिया को अपना हथियार बना डालते है पर हम भूल जाते है की हथियार की भी धार को तेज़ करनी पड़ती है बिना धार के हथियार जादा समय तक साथ नही देते और फिर हम इस तरह की घटनाओं को ब्रेकिंग न्यूज़ बना कर लोगो के बीच एक तरह का भय या विद्रोही भावनाओं को उनके अन्दर पैदा करते है और एक तरह की लोगो की मानसिकता बना डालते है की इस सिस्टम का कोई बदलाव नही हो सकता लोग कुछ दिन हा-हुला करते है और अपनी ज़िन्दगी को फिर से उसी ट्रेक पर ले आते है
सोशल मीडिया बदलाव का कितना जरिया बना है, ये पूर्ण तरह से कहना संभव नही है ये जरिया है पर इस का इस्तेमाल ठीक प्रकार से नही हो रहा कभी कभी लोगो की तीखी टिप्पणी इस प्रकार की होती है जैसे उनका मन मचला रहा हो और वो यहाँ उल्टी करना शुरु कर देते है जो सही नही है लोग इन सब चीजों पर अपना एकाधिकार समझते है पर ऐसा करना सोशल मीडिया के लिए कई अपराधिक दरवाजे खोलने जैसा है कहते है शब्दों मे और कलम में ताकत होती है ऐसी ही कुछ ताकत सोशल मीडिया भी है उन लोगों के लिए जिनके विचार बदलाव के प्रति क्रातिकारी है सोशल मीडिया मनोरंजन का भी माध्यम है और बदलाव का भी पर इस सोशल मीडिया की कई कमियाँ भी है जो हम सब के सामने है और हम इन से अनभिज्ञ नही है
निधि

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