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"गुरू की बली”

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  वैसे तो किताबों में गुरू के बारे में बड़े बड़े वाक्य कहे गए है – जैसे गुरू “ ब्रहमा ” गुरू “ विष्णु ” , “ गुरू कुम्हार शिष्य कुभं ” है। अधंकार से प्रकाश की ओर गुरू ही ले जाता है वैसे ये सारी बात सत्य है लेकिन इन बातों से भारतीय राजनीति का कोई लेना देना नही है, क्योकि यहाँ गुरू की बली देने की प्रथा है इसके ताजे उदाहरण भी है ओर कुछ बासी भी जैसे जेपी आन्दोलन की बात की जाए जब लोकनायक जेपी ने आंदोलन की राग अलापी तो बहुत सारे नेता आगे आए जिनमें लालू,नीतिश,रविशकंर इन सभी ने दुनिया बदलने की शपत ली लेकिन जैसे ही इनका उल्लू सीधा हुआ यानी राजनीति चमकी ये लोग जेपी को छोड़ आगे निकल गए ओर नए उदाहरण में हमारे माननीय-समाननीय अण्ना जी का है जो भूखे बेचारे 13 दिन खुद मरे ओर केजरीवाल  मजे उठा रहे है यानी “ गुरू अपने गावँ में चेला सत्ता की छावँ में ” वही काम दुनिया की दीदी किरण बेदी सहित तमाम लोगो ने किया यानी गुरू की बली ओर एकदम ताजे उदाहरण में मोदी जी का उदाहरण लिया जा सकता है वो आडवाणी जी को मानते है ऐसा लोग कहते है और सत्य ही कहते है अगर इतिहास के पन्नें को पलटा जाए तो ऐसा लगता है कि...

आज भी कुछ बाकी है...

                              आज इन आँखो पर किसी का जोर नही था , बार बार अपने आपको समझाने में लगा हुआ था कुछ पुरानी बातों  को जीवंत अपनी आखो से देखना अपने ज़हन में उतारने की महज एक  कोशिश कर रहा था सब कुछ जानने के बाद  भी थोड़ा सा ओरों जैसा बनना चाहता था....... बात कुछ ऐसी थी   सुबह का टाइम अक्सर मेरा मेरी कॉलेज की लाब्रेरी में निकलता है बस वो ही रोज़ का काम अखबार पढना पर आज की सुबह मेरे लिए कुछ नया सन्देश लेकर आई हो ऐसा मुझे एहसास तब हुआ जब मैं काफी देर से चल रहे शोर को पीछे मुड़कर देखना शुरू किया  बस वो ही एक पल था जिसको मैंने अपने दिल की गुल्क में डाल दिया आज  अनजान से व्यक्ति ने मुझे अपनें आपको ढूढ़ने के लिए मजबूर कर दिया वो इंसान मेरे कॉलेज के एक सफाई कर्मचारी थे उनको एक काम दिया गया की लाब्रेरी की सभी अलमारियों को साफ़ करके उनमे वापस से किताबो को लगाना। उनका  काम बहुत आसान था पर खास क्या था इस में खासियत ये थी की जो इंसान कभी नही पढ़ा जिसने कभी किताबो को...

सोशल मीडिया टाइमपास या बदलाव का मंच

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तेज़ी से बदलती दुनिया, तेज़ होते शहरीकरण और जड़ो से उखड़ते लोगो और टूटते सामाजिक ताने-बाने ने इन्टरनेट को तेज़ी से लोकप्रिय बनाया है कभी अखबार,किताबे दोस्त होती थी तो आज का दोस्त इन्टरनेट है क्यों की ये दो तरफ़ा सवाद का भी माध्यम है आज का पाठक सब कुछ तुरत चाहता है मतलब “इस्टेट और इस की भरपाई करता है इंटरनेट और उस से जुडी साइट्स “सोशल मीडिया “ आज समाज में सोशल साइट्स का अलग बोल-बाला है इन के द्वारा आज हर सूचना के जैसे पख से लग गए है आज इस माध्यम ने कही न कही हमें हमारी पुरानी यादो को वापस किया है एक अकेले इंसान का साथी बना है किसी को प्यार दिया और किसी और रुला दिया और किसी को ज़िन्दगी भर का साथी दिया जहा एक बेटी अपनी माँ को सब बताया करती थी आज इस मीडिया ने उसको भी बदल कर रख दिया उसके मन की भावनाओ को जानने के लिए फेसबुक ट्विटर देखना पड़ जाता है इस मीडिया ने हम सब की ज़िन्दगी में किसी न किसी तरह का बदलाव किया है अगर ये कह ले की सोशल मीडिया एक तरह से वर्चुअल दुनिया है इससे बनाने वाले हम है फेसबुक,ट्विटर की नज़र से एक नयी दुनिया बनी है इन सोशल साइट्स ने हमें आखे दी है नए दोस्त नयी समझ भी, यहाँ...
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एक लड़की -हिदायतों, समझौतों का प्रतिरूप होती है हँसने, बोलने, चलने मेउसकी पहचान साथ होती है... .रातें, सुनसान रास्तेसुरक्षित नही होते उसके वास्ते "प्यार" की पैनी धार परकसौटी उसकी होती है खरी उतरी तो ठीक वर्ना अनगिनत उँगलियों का शिकार होती है...... .क्यों एक लड़की की ज़िन्दगी को तराजू में रखी वस्तु के समान तोला जाता है .... .क्यों वो हर वक़्त दो राहो पर खड़ी होती है आगे बढ़े तो .... .मिशालऔर एक छोटीसी मुस्कान के लिए तो एक चर्चित कहानी बन जानती  व्हहा रे लड़की तेरी किस्मत तो अनकही बातो में ही सिमट जाती है  क्यों उसकी आवाज, रचना को हर वक़्त एक कटखरे से गुजरना पड़ता है सिर्फ "" क्यों "" ही उसकी पूरी ज़िन्दगी का एक सवाल बन जानता है  निधि ( सिर्फ एक कोशिश बदलाव की, सोच की...)  

आओ यारो आज कुछ ........

आओ यारो कुछ उल्टा करते है इन सफेदी के कागजो पर  अपनी प्रतिभा को  एक नया रंग देकर देखते है  आओ यारो कुछ उल्टा करते है.......... फूलो से  उनकी खुशबू की   हर कोई बात करता है चलो आज काटो से उनकी दर्द की बात करते है इस वक़्त को तो  हर कोई चुराना चाहता है वक़्त की इस शाख से आज  लम्हों को चुरा कर देखते है आओ यारो कुछ उल्टा करते है.......... इन तूफानों की बरसात तो हर कोई देखता है चलो आज प्यार के बादल बना कर देखते है आज अपने दुश्मनों को जी कर दिखाते है इस उदासी के पेड़ में प्यार का पानी डाल कर देखते है आओ यारो कुछ उल्टा करते है..... इस प्यार में चाँद तारो से बात हर कोई करता है चलो आज पूरे आसमा से बात की जाये प्यार की दास्ता को हर रोज़ अपने दोस्तों में गुनगुनाते है चलो आज उस दोस्ती का फीडबैक तो  लिया जाये आओ यारो कुछ उल्टा करते है हर किसी को याद है शीला की जवानी मुनी की बदनामी पर याद नही तो कितो की जेब गर्म है, और कितो के हाथ में तख्ती चलो आज उनको अपनी उगलियों पर याद करते है आओ यारो कुछ उल्टा करते है उड़ान भरते इन कदमो को जमी पर ला द...

बहरूपिया शहर में अपनी ज़िन्दगी ......

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न जाने क्या चाहती है मुझसे ये ज़िन्दगी। जब भी कोई कदम बढ़ाया है ज़हन में एक सवाल छोड़कर उसका जवाब चाहती है मुझसे ये ज़िन्दगी। मेरी हर चाहत को तोड़ा है इसने मेरा एक हमदर्द बनकर उसके बदले मेरे आंसू चाहती है मुझसे ये ज़िन्दगी। जब भी मैं सोचती हूँ इसके बारे में तो दिल से यही दुआ निकली है मिल जाए इसे जो ये चाहती है मुझसे ये ज़िन्दगी। यू न रूठो मुझसे मेरी ज़िन्दगी एक बार तो पूछो मुझसे मेरा इंसानी सफ़र  कैसे इस बहरूपिये शहर में जी रही हू मैं.... अपनी तस्वीर बनाने में जुटे है.... सब यहाँ पर जैसा जो चाहता है वैसे बनती है कहा..... ना जाने क्या चाहती है मुझसे ये ज़िन्दगी क्यों इस बहरूपिया शहर में बसी है मेरी ज़िन्दगी निधि ...

पहला प्यार.....और मामला गडबड....:)

जब किसी का संग अच्छा लगने लगे जब किसी का इंतज़ार घंटों होने लगे ......!! तो समझ जाओ – मामला गड़बड़ है  जब दिल बहाने बना बना करखुद को ही छलने लगे जब सांस किसी को देख, थमने लगे  किसी को देख नजरें बस उसी की होने लगे तो समझ जाओ – मामला गड़बड़ है I जब किसी की हाँ में हाँ मिलाने को दिल करने लगे किसी को बस यूँ ही देखते रहने का मन करने लगे तो समझ जाओ – भाई मामला पक्का गड़बड़ है I जब बंद आंखों में उसी का ही ख्याल चलने लगे अजनबी सा कोई दिल पर बार-बार दस्तख देने लगे। रात को बार-बार चांद देखकर मुस्कुराने का मन करें तो समझ जाओ मामला गड़बड़ है जब उस अनजान शख्स को देखने के लिए घंटों आईने के सामने चुप-चुप कर हंसने को मन करें तो गुरू मामला गड़बड़ नहीं बहुत गड़बड...है। निधि .....